भारत में म्यूचुअल फंड्स किस-किस प्रकार के होते हैं ?
म्यूचुअल फंड लोकप्रिय निवेश विकल्प हैं क्यूंकि वे सभी प्रकार के निवेशकों के लिए निवेश के अवसर प्रदान करते हैं।
अपने विशेषताओं के आधार पर म्यूचुअल फंड को अलग अलग श्रेणी में विभाजित किया गया है, जैसे की स्ट्रक्चर, एसेट क्लास, गोल्स, इत्यादि। चलिए इसे विस्तार से जानें।

स्ट्रक्चर बेस्ड फंड्स
- ओपन एंडेड फंड्स: ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड निवेश फंड हमेशा नए निवेश और रिडेम्पशन के लिए खुले हैं। निवेशक इन फंड्स में कभी भी निवेश कर सकते है और कभी भी विथड्रॉ कर सकते है।
- क्लोज्ड एंडेड फंड्स: क्लोज-एंडेड म्यूचुअल फंड में आप एक विशिष्ट समय पर ही निवेश कर सकते है। क्लोज्ड-एंड फंड में शेयरों की एक निश्चित संख्या होती है, एक बार शेयर बिक जाने के बाद, नए शेयर बनाए या रिडीम किये नहीं जाते। इसलिए, शेयरों की संख्या स्थिर रहती है।
- इंटरवल फंड्स: इंटरवल म्यूचुअल फंड ओपन-एंडेड और क्लोज-एंडेड फंड दोनों की विशेषताओं से बनते है। इसमें निवेशक विशिष्ट इंटरवल में शेयर्स खरीद या बेच सकते है, आमतौर पर तिमाही या अर्ध-वार्षिक आधार पर।
एसेट क्लास बेस्ड फंड्स
- इक्विटी फंड्स: इक्विटी फंड्स ध्यान से चुनी गई इक्विटी स्टॉकों में निवेश करते हैं। ये फंड्स लंबे समय के लिए निवेश करने के लिए बनाए जाते हैं और निवेशकों को मैक्सिमम प्रॉफिट के लिए प्रयास करते हैं, लेकिन इसमें रिस्क भी ज्यादा होती है। इक्विटी फंड्स आगे लार्ज-कैप फंड, मिड-कैप फंड, स्मॉल-कैप फंड, फोकस्ड फंड में विभाजित होते है।
- डेब्ट फंड्स: डेब्ट फंड्स इनकम प्रोडक्ट्स में निवेश करते है जैसे की कॉर्पोरेट बांड, ट्रेजरी बिल, बैंक डिपॉजिट्स, सरकारी स्कीम्स इत्यादि। डेब्ट फंड्स निवेशक को काम जोखिम के साथ फिक्स्ड इनकम प्रोवाइड करते है।
- हाइब्रिड फंड्स: हाइब्रिड फंड्स इक्विटी और डेब्ट निवेश करते हैं। इन फंड्स का मुख्य उद्देश्य निवेशकों को बैलेंस बनाए रखना होता है। हाइब्रिड फंड्स निवेशकों को एक संयोजित प्रोफ़ाइल प्रदान करते हैं जो उन्हें उच्च और नियमित इनकम के साथ मध्यम रिस्क प्राप्त करते है।
इन्वेस्टमेंट गोल बेस्ड फंड्स
- ग्रोथ फंड्स: ग्रोथ फंड्स वे म्यूचुअल फंड्स होते हैं जो हाई परफार्मिंग स्टॉक्स में निवेश करते है और निवेशकों को लंबे समय के लिए मार्जिन से लाभ उठाने की संभावना प्रदान करते हैं।
- टैक्स सेविंग फंड्स: टैक्स सेविंग फंड्स (ईएलएसएस) निवेशकों के लिए एक कर बचाने वाले निवेश विकल्प होते हैं। ये फंड्स विभिन्न कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं और निवेशकों को आयकर में छूट प्रदान करते हैं। ईएलएसएस में निवेश किए गए धन का मिनिमिम तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है।
- लिक्विड फंड्स: लिक्विड फंड्स निवेशकों को आसानी से एक्सिट होने का विकल्प देते हैं। ये फंड्स साधारणतः शॉर्ट टर्म में निवेश करते हैं और कम मार्जिन पर रिटर्न्स प्रदान करते हैं। लिक्विड फंड्स का उद्देश्य सुरक्षितता, लिक्विडिटी, और अच्छे रिटर्न्स प्राप्त करना है।
- कैपिटल प्रोटेक्शन फंड्स: कैपिटल प्रोटेक्शन फंड्स निवेशकों को निवेश की मूल राशि (capital) की सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। इन फंड्स में निवेशकों का पूंजी का हिस्सा फिक्सइड इनकम प्रोडक्ट्स में निवेश किया जाता है।
- फिक्स म्यचुरीटी फंड्स: फिक्स्ड म्यूचरिटी फंड्स वे निवेश फंड होते हैं जो निवेशकों की पूंजी फिक्स्ड म्यूचरिटी वाले सिक्योरिटीज में निवेश करते है जिससे निवेशक को नियमित इनकम के साथ सुरक्षितता प्रदान की जाती हैं। उदाहरण के लिए, तीन साल का फिक्स्ड म्यूचरिटी फण्ड तीन साल या उससे कम की म्यूचरिटी अवधि वाली सिक्योरिटीज में निवेश करेगा।
- पेंशन फंड्स: पेंशन फंड्स निवेशकों के लिए पेंशन के लिए बचत और निवेश करने का माध्यम प्रदान करते हैं। ये फंड्स निवेशकों को लंबे समय तक धन को इकट्ठा करने और निवेश करने की अनुमति देते हैं, जिससे वे अपने पेंशन के लिए आवश्यक धन को बनाए रख सकें।
रिस्क बेस्ड फंड्स
- वेरी लो रिस्क फंड्स
- लो रिस्क फंड्स
- मीडियम रिस्क फंड्स
- हाई रिस्क फंड्स
रिस्क बेस्ड म्यूचुअल फंड निवेशकों की विभिन्न जोखिम के नुसार निवेश करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। निवेशक अपनी जोखिम सहनशीलता और निवेश उद्देश्यों के अनुरूप फंड्स चुन सकता है। हर एक म्यूचुअल फंड को रिस्क-ओ-मीटर (risk-o-meter) माध्यम से अपने फंड के जोखिम का खुलासा करना जरुरी है।
म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले, फंड के प्रॉस्पेक्टस की सावधानीपूर्वक रिव्यु करें, अपनी जोखिम सहनशीलता, निवेश के गोल्स पर विचार करें और यदि आवश्यक हो तो फाइनेंसियल एडवाइजर की सलाह ले।
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