बियर और बुल मार्केट क्या है?
विभिन्न कारकों के कारण शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव का अनुभव होता है। शेयर बाज़ार में हमेशा मंदी और तेजी दोनों अवस्था देखि जाती है जिसको बियर और बुल के रूप में सम्बोधित किया जाता है।

बियर मार्किट
जब बाजार में गिरावट होती है तब उसे बियर मार्किट कहते है। मंदी के बाजार के दौरान, मंदी के बाजार के दौरान, आम तौर पर ज्यादा निराशावाद होता है, और निवेशक अपने शेयर्स को बेच देते हैं, जिससे बाजार में गिरावट आती है।
बियर मार्किट के दौरान अक्सर आर्थिक मंदी, उच्च बेरोज़गारी दर और इकॉनमी में गिरावट का अनुभव होता है। बियर मार्किट कई महीनों या वर्षों तक चल सकता है।
बुल मार्केट
दूसरी ओर, बुल मार्केट का तात्पर्य बढ़ती या आशावादी बाजार प्रवृत्ति से है। बुल मार्केट में शेयर बाजार तेजी से ऊपर जाता है, इस दौरान, निवेशक स्टॉक खरीदने और रखने को प्राधान्य देते है, जिससे मांग बढ़ती है और बाजार में तेजी आती है।
तेजी का बाजार अक्सर आर्थिक विस्तार से जुड़ा होता है और लंबे समय तक चल सकता है, जिसके परिणामस्वरूप निवेशक अच्छे रिटर्न्स कमा सकता है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बाजार की स्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं। बियर मार्किट और बुल मार्केट इन शब्दों का उपयोग बाज़ार की कंडीशन और सेंटीमेंट्स का वर्णन करने के लिए किया जाता है, और ये निवेश स्ट्रेटेजी और निर्णयों लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुछ मामलों में, कम समय सीमा के भीतर ही मार्किट बुलिश या बियरीश हो सकता है। शेयर मार्किट में एक्सपर्टीज हासिल करके, आप दोनों भी मार्किट कंडीशन में मुनाफा कमा सकते हो।
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