मार्किट कैपिटलाइजेशन क्या है?

मार्केट कैपिटलाइजेशन शेयर बाजार में कंपनी जो शेयर्स है उनके कुल मूल्य को संदर्भित करता है। मार्केट कैपिटलाइजेशन को “मार्केट कैप” के रूप में भी जाना जाता है। किसी कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन की गणना शेयरों की कुल संख्या को एक शेयर के मौजूदा बाजार मूल्य से गुणा करके की जाती है।

उदाहरण के लिए किसी कंपनी के एक शेयर की कीमत १०० रुपये है और कुल १,००० शेयर्स बाजार में हैं तो उस कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन १,००,००० है। शेयर बाजार में कंपनी का साइज और उसके वैल्यूएशन को निर्धारित करने के लिए मार्केट कैपिटलाइजेशन का उपयोग एक प्रमुख मीट्रिक के रूप में किया जाता है।

बड़े मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली कंपनियों को आमतौर पर छोटे मार्केट कैप वाली कंपनियों की तुलना में अधिक स्थिर और कम जोखिम भरा माना जाता है।

मार्किट कैपिटलाइजेशन क्या है?

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) दो प्राथमिक स्टॉक एक्सचेंज हैं, और वे अपने एक्सचेंजों में लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन पर रियल टाइम जानकारी प्रदान करते हैं। मई 2023 तक, बीएसई पर सभी लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग २५० ट्रिलियन रुपये था, जबकि एनएसई पर सभी लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग २०० ट्रिलियन रुपये था।

शेयर बाजार में मार्केट कैपिटलाइजेशन के ३ मुख्य प्रकार है

  1. लार्ज कैप (Large cap)
  2. मिड कैप (Mid cap)
  3. स्मॉल कैप (Small cap)

लार्ज कैप

ये ऐसी कंपनियां हैं जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन २०,००० करोड़ रुपये से अधिक है। लार्ज कैप कंपनियों को अक्सर अधिक एस्टाब्लिशड और स्थिर माना जाता है, और उनके पास आमतौर पर सक्सेस और प्रोफिटेबिलिटी का एक लंबा इतिहास होता है। भारत में लार्ज कैप कंपनियों के उदाहरणों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और टीसीएस शामिल हैं।

मिड कैप

इस केटेगरी में ५,००० करोड़ से २०,००० करोड़ के बीच मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली कंपनियां हैं। मिड कैप कंपनियों को अक्सर संभावित विकास के अपॉर्चुनिटी के रूप में देखा जाता है, क्योंकि उनमें भविष्य में तेजी से बढ़ने की क्षमता होती है। मिड कैप कंपनियों के उदाहरणों में बजाज फाइनेंस, गोदरेज प्रॉपर्टीज और वोल्टास शामिल हैं।

स्मॉल कैप

ये ५,००० करोड़ रुपये से कम के मार्केट कैप वाली कंपनियां हैं। स्मॉल कैप कंपनियाँ आम तौर पर बड़ी और मिड कैप कंपनियों की तुलना में नई और छोटी होती हैं, और उनमें अक्सर हाई ग्रोथ पोटेंशियल की क्षमता होती है, लेकिन जोखिम भी ज्यादा होता है। भारत में स्मॉल कैप कंपनियों के उदाहरणों में मणप्पुरम फाइनेंस, कैप्लिन पॉइंट लेबोरेटरीज और सुवेन लाइफ साइंसेज शामिल हैं।

यह नोट करना महत्वपूर्ण है कि मार्केट कैपिटलाइजेशन कंपनी के परफॉरमेंस और क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए उपयोग किए जाने वाले कई मेट्रिक्स में से एक है।

सिर्फ मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर निवेश करना रेकमेंडेड नहीं है। निवेश करने से पहले निवेशक को अन्य फैक्टर्स का भी विचार करना चाहिए, जैसे की, रेवेन्यू ग्रोथ, प्रोफिटेबिलिटी, डेब्ट, मैनेजमेंट इत्यादि।

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